Aalam-Keli Aalam आलम-केलि आलम बाल-लीला 1. पालने खेलत नंद-ललन छलन बलि पालने खेलत नंद-ललन छलन बलि, गोद लै लै ललना करति मोद गान है । 'आलम' सुकवि पल पल मैया पावै सुख, पोषति पीयूष सुकरत पय पान है । नंद सों कहति नंदरानी हो महर सुत, चंद की सी कलनि बढ़तु मेरे जान है । आइ देखि आनंद सों प्यारे कान्ह आनन में, आन दिन आन घरी आन छबि आन है ।।1।। 2. झीनी सी झंगूली बीच झीनो आँगु झलकतु झीनी सी झंगूली बीच झीनो आँगु झलकतु, झुमरि झुमरि झुकि ज्यों क्यों झूलै पलना । घुंघरू घुमत बनै घुंघुरा के छोर घने, घुंघरारे बार मानों घन बारे चलना । आलम रसाल जुग लोचन बिसाल लोल, ऐसे नंदलाल अनदेखे कहूँ कल ना । बेर बेर फेरि फेरि गोद लै लै घेरि घेरि, टेरि टेरि गावें गुन गोकुल की ललना ।।2।। 3. जसुदा के अजिर बिराजें मनमोहन जू जसुदा के अजिर बिराजें मनमोहन जू, अंग रज लागै छबि छाजै सुरपाल की । छोटे छोटे आछे पग घुंघरू घूमत घने, जासों चित हित लागै सोभा बालजाल की । आछी बतियाँ सुनाबै छिनु छांड़िबौ न भावै, छाती सों छपावै लागै छोह वा दयाल की । हेरि ब्रज नारि हारी वारि फेरि डारी सब, आलम बलैया लीजै ऐस...
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